Lucknow: Green Corridor Project, 7710 करोड़ रुपये का शहर-बदलने वाला Project
लखनऊ में राजधानी विकास का एक बड़ा Infrastructure project तेजी से आगे बढ़ रहा है: गोमती नदी के किनारे एक 57 किलोमीटर लंबा “ग्रीन कॉरिडोर” बनाया जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹7710 करोड़ बताई जा रही है, और इसे प्रशासन शहर के यातायात और कनेक्टिविटी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रहा है। (Jagran)
क्या है यह Green Corridor परियोजना?
- यह परियोजना लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा शुरू की गई है। (Jagran)
- योजना गोमती नदी के दोनों किनारों के साथ लगभग 57 किलोमीटर लंबी सड़क, फ्लाईओवर, ब्रिज और बंधों के निर्माण का एक मिश्रित नेटवर्क है। (Jagran)
- इसका लक्ष्य राजधानी के भीतरी और बाहरी इलाकों के बीच बेहतर ट्रैफिक कनेक्टिविटी और वाहन आवागमन में सुधार करना है। (Jagran)
इस ग्रीन कॉरिडोर प्रस्ताव का उद्देश्य है कि शहर के राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों के बीच यातायात को सहज रूप से जोड़ा जा सके। (The Times of India)
परियोजना के मुख्य घटक
इस प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल हैं, जिनमें हैं:
ब्रिज और बंधे
- 240 मीटर लम्बा व 24 मीटर चौड़ा कुकरैल छह-लेन ब्रिज लगभग पूरा हो चुका है। (Jagran)
- इसी तरह निशातगंज छह-लेन ब्रिज का निर्माण भी प्रगति पर है। (Jagran)
- 1.10 किमी लंबा सड़क विस्तार व बंधा भी बनाया जा रहा है। (Jagran)
रास्तों का चौड़ीकरण और Connectivity
- पक्का पुल से पिपराघाट तक, और शहीद पथ तक सड़क के चौड़ीकरण व कनेक्टर मार्ग बनाए जा रहे हैं। (Jagran)
रूट नेटवर्क
- परियोजना के प्रथम चरण कार्यों में आईआईएम रोड से पक्का पुल तक का मार्ग पहले से पूरा हो चुका है। (Jagran)
- अन्य चरण जैसे पिपराघाट से शहीद पथ तक, और शहीद पथ से किसान पथ तक कार्य प्रगति पर हैं। (Jagran)
लखनऊ के ट्रैफिक और नजदीकी रूटों में बदलाव
ग्रीन कॉरिडोर के हिस्से के रूप में यातायात सुधार के कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं:
मुख्य चौराहों का री-डिज़ाइन
लखनऊ विकास प्राधिकरण शहर के कई प्रमुख चौराहों को नए ढंग से विकसित या पुनः डिज़ाइन कर रहा है, ताकि वाहनों का प्रवाह बिना रुकावट के सुनिश्चित हो सके। (News Minimalist)
नया लिंक मार्ग और यात्रा समय में कमी
समतामूलक (Samatamulak) से निशातगंज के बीच नया लिंक मार्ग तैयार हो रहा है, जिससे कुछ यात्री मार्गों पर यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद जताई गई है। (Hindustan Times)
निर्माण की स्थिति
- ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का निर्माण कई चरणों में प्रगति पर है और इससे जुड़े प्रमुख ब्रिज व सड़कों की अधिकांश संरचनात्मक कार्य उन्नत अवस्था में हैं। (Jagran)
- जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि यातायात व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए बाकी कार्य तेजी से पूरा किए जा रहे हैं। (The Times of India)
क्या यह एक “पुल” परियोजना है?
यह महत्वपूर्ण है कि 7710 करोड़ का प्रोजेक्ट एक अकेले बड़े पुल का निर्माण नहीं है।
इसके बजाए यह एक व्यापक “ग्रीन कॉरिडोर” इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम है, जिसमें सड़कें, ब्रिज, बंधे, चौड़ीकरण-कार्य और कनेक्टिविटी सुधार शामिल हैं। (Live Hindustan)
परियोजना का उद्देश्य
इस परियोजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- ट्रैफिक जाम में कमी
- शहरी कनेक्टिविटी में सुधार
- दूरी-यात्रा के नेटवर्क को बेहतर बनाना
- गोमती नदी के किनारे भविष्य-गतिशील योजनाओं को सशक्त बनाना
ये सब इस बड़े कोरिडोर प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में लिए जा रहे हैं। (Jagran)
निष्कर्ष
लखनऊ में गोमती नदी के किनारे 57 किलोमीटर लंबे ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट का निर्माण जारी है। इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹7710 करोड़ आंकी जा रही है। यह प्रोजेक्ट अलग-अलग सड़कों, ब्रिजों और बंधों के निर्माण का एक बड़ा समन्वित प्रयास है, न कि केवल एक पुल का निर्माण। इस योजना का लक्ष्य शहर की यातायात व्यवस्था, कनेक्टिविटी और भविष्य-गतिशील इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देना है। (Jagran)
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